Money Market और Capital Market क्या होता है?
Money Market और Capital Market क्या होता है?
दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि Money Market और Capital Market क्या होता है। दोस्तों आपको तो पता ही होगा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उस देश के Market के ऊपर काफी ज्यादा निर्भर करती है। क्योंकि Market एक ऐसी जगह होती है, जहां पर खरीदी और बिक्री करी जाती है। जिसके कारण मुद्रा का काफी ज्यादा लेनदेन होता है। इस पूरे सिस्टम को ही हम Market कहते हैं। लेकिन Market भी काफी तरह के होते हैं, जिनके बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं।
मुद्रा बाजार क्या होता है?(Money Market)
दोस्तों वित्तीय बाजार का वह भाग जहां पर कम समय के लिए वित्तीय जरूरतों की पूर्ति करी जाती है। उसको मुद्रा बाजार कहा जाता है, मतलब की एक ऐसी जगह जहां पर कम समय के लिए पैसों का लेनदेन करा जाता है, यहां पर कम समय का मतलब है कि 365 दिन से कम समय।
आसान शब्दों में कहें तो एक ऐसी जगह पर आप किसी को उधार दे रहे हो, या फिर किसी से उधार लेकर बिजनेस के लिए वोभी 365 दिन से कम दिनों के लिए। तो उसको मुद्रा बाजार कहा जाता है, इसमें नगद प्रबंधन बिल, बचत प्रमाण पत्र, ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर, कमर्शियल बिल, मुचल फंड के माध्यम से पैसों का लेन देना करा जाता है।
मुद्रा बाजार के प्रकार-
दोस्तों मुद्रा बाजार 2 तरीके के होते हैं, जिनके बारे में आपको नीचे पढ़ने को मिल जाएगा।
1.असंगठित मुद्रा बाजार
दोस्तों इस तरह के बाजार काफी पुराने समय से ही हमारे बीच में चले आ रहे हैं। अगर आपको थोड़े पैसों की जरूरत होती है, या फिर किसी चीज को खरीदने के लिए कुछ पैसों की जरूरत पड़ती है, और आपने अपने पड़ोसियों से उधार ले लिया है, या फिर किसी साहूकार से ले लिया है। अब साहूकार की मर्जी कि वह कितने ब्याज पर आपको देता है, इस तरह के Market में ब्याज को नियंत्रण करने की कोई संस्था नहीं होती है।
2. संगठित मुद्रा बाजार
दोस्तों इस तरीके का मुद्रा बाजार संगठित होता है, जिसको विनियमित करने के लिए कोई भी मान्यता प्राप्त संस्था नहीं होती है। जैसे कि भारत के आरबीआई हैं, अगर आप बैंक से कोई भी लोन लेंगे तो आरबीआई यह तय करता है, कि वह बैंक कितने प्रतिशत पर ब्याज ले सकता है। अगर उससे ज्यादा लिया तो बैंक पर कार्यवाही हो सकती है।
पूंजी बाजार क्या होता है?(Capital market)
दोस्तों यह ऐसा वित्तीय बाजार होता है, जहां पर आप लंबे समय तक के लिए वित्तीय जरूरतों की पूर्ति को कर सकते हैं। उसको ही पूंजी बाजार कहते हैं। यहां पर लंबे समय का मतलब है, कि 1 साल से ज्यादा की अवधि के लिए कोई भी व्यक्ति जो 1 साल से ज्यादा समय के लिए पूंजी जुटाना चाहता है। उसे पूंजी बाजार से ही पैसा उठाना पड़ता है।
आसान शब्दों में कहे तो ऐसा वित्तीय बाजार जहां पर कि आप 1 वर्ष या फिर उससे अधिक समय के लिए डेट या इक्विटी समर्थित प्रतिभूतियों को खरीदना या फिर बेचना होता है। तो उसे पूंजी बाजार कहते हैं। जैसे भारत के अंदर स्टॉक एक्सचेंज और कमर्शियल बैंक आदि होते हैं।
पूंजी बाजार एक ऐसी जगह होती है, जो कि उन लोगों को साथ लाती है। जो कि काफी पूंजी रखते हैं और जो पूंजी की मांग को एक साथ करते हैं
मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार का उपयोग-
दोस्तों मुद्रा बाजार और पूंजी बाजार इन दोनों का ही इस्तेमाल फंड रेस करने के लिए करा जाता है। जब भी किसी कंपनी को अपना बिजनेस आगे बढ़ाना होता है, तो बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए। वह अपने रेगुलर ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए। वह इन दोनों Market से ही पैसे को उठाता है, जहां पर कि निवेशकों को भी कंपनी के फायदे के अनुसार ही फायदा दिया जाता है। दोस्तों अगर आप भी अपनी कंपनी को चला रहे हो या फिर आप भी शेयर Market के अंदर आना चाहते हो। तो आपको इन दोनों Market के बारे में काफी अच्छी तरीके से समझ होनी चाहिए। क्योंकि शेयर Market के अंदर आपको इन्हीं दोनों के बीच में काम करना पड़ता है।
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